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चैत्र नवरात्रि दूसरा दिन: मां ब्रह्मचारिणी को किस चीज का भोग लगाएं? (प्रिय रंग, मंत्र और पूजा विधि)

By HindiTerminal 5 min read

‘ब्रह्म’ का अर्थ है तपस्या और ‘चारिणी’ का अर्थ है आचरण करने वाली। अर्थात तप का आचरण करने वाली देवी ही मां ब्रह्मचारिणी हैं। माता के एक हाथ में जप की माला और दूसरे हाथ में कमंडल होता है। जो भी भक्त सच्चे मन से नवरात्रि के दूसरे दिन माता के इस स्वरूप की पूजा करता है, उसे ज्ञान, सदाचार और वैराग्य की प्राप्ति होती है।

माता की असीम कृपा और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उनकी पूजा पूरे विधि-विधान से करनी चाहिए। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को किस चीज का भोग लगाना चाहिए, माता का सबसे प्रिय रंग कौन सा है, और आप घर पर ही बहुत आसान तरीके से उनकी पूजा कैसे कर सकते हैं।

मां ब्रह्मचारिणी को किस चीज का भोग लगाएं?

नवरात्रि के पावन दिनों में माता के हर स्वरूप को उनका प्रिय भोग अर्पित करने का एक विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है। अगर हम मां ब्रह्मचारिणी की बात करें, तो माता को सादगी अत्यंत प्रिय है। शास्त्रों और मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर (चीनी) और पंचामृत का भोग सबसे ज्यादा पसंद है। मुख्य भोग के अलावा यदि आप चाहें तो माता को मिश्री, सफेद बर्फी, दूध से बनी मिठाइयां या खीर का भोग भी पूरी श्रद्धा के साथ लगा सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर का भोग लगाने से परिवार के सदस्यों की आयु में वृद्धि होती है। इसके साथ ही, इस भोग को लगाने से व्यक्ति के जीवन से मानसिक तनाव दूर होता है और घर-परिवार में हमेशा सुख-शांति का वास बना रहता है।

A close-up of an ornate brass Hindu puja thali holding two bowls of prasadam: one with white sugar crystals (mishri) and the other with a creamy white dessert (kheer). A lit earthen diya with a flame sits in the foreground, and fresh white jasmine flowers are arranged on the plate. The thali is placed on a red embroidered cloth with a blurred temple mandap in the background.

भोग लगाने का सही तरीका

माता को भोग अर्पित करते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना बहुत आवश्यक है। माता को भोग हमेशा साफ और शुद्ध बर्तन में ही अर्पित करना चाहिए, जिसके लिए आप चांदी, तांबे या पीतल के पात्र का उपयोग कर सकते हैं। भोग अर्पित करते समय आपका मन पूरी तरह से शुद्ध होना चाहिए और भीतर पूर्ण श्रद्धा भाव होना चाहिए। भोग लगाते समय माता के मन्त्रों का मन ही मन जाप करते रहें। एक बात का विशेष ध्यान रखें कि माता दुर्गा की पूजा में कभी भी तुलसी दल (तुलसी के पत्तों) का प्रयोग नहीं किया जाता है, इसलिए माता के भोग के साथ हमेशा केवल शुद्ध जल या गंगाजल ही रखना चाहिए।

मां ब्रह्मचारिणी का प्रिय रंग और पुष्प

चूंकि मां ब्रह्मचारिणी एक तपस्विनी के रूप में हैं, इसलिए उन्हें अत्यंत सादगी भरे रंग पसंद आते हैं। पूजा के दौरान भक्तों को विशेष रूप से सफेद या पीले रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए। सफेद रंग शांति, पवित्रता और शुद्धता का प्रतीक माना जाता है, जो तपस्विनी माता को बहुत भाता है। वहीं अगर पुष्पों की बात करें, तो मां ब्रह्मचारिणी की पूजा में उन्हें सफेद कमल या चमेली (Jasmine) के फूल अर्पित करने चाहिए। यदि किसी कारणवश आपको ये फूल न मिल पाएं, तो आप कोई भी सफेद रंग का सुगंधित फूल माता के श्री चरणों में अर्पित कर सकते हैं, माता उसे भी सहर्ष और प्रसन्नता पूर्वक स्वीकार करती हैं।

मां ब्रह्मचारिणी की सरल पूजा विधि

माता की असीम कृपा पाने के लिए पूजा की एक सटीक विधि अपनानी चाहिए। सबसे पहले सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं और स्वच्छ सफेद या पीले वस्त्र धारण कर लें। इसके बाद अपने पूजा स्थल को साफ करके वहां गंगाजल छिड़क कर उसे पवित्र करें। पूजा की शुरुआत में सबसे पहले कलश देवता और विघ्नहर्ता भगवान गणेश का ध्यान कर उनकी पूजा संपन्न करें। गणेश वंदना के बाद मां ब्रह्मचारिणी की मूर्ति या तस्वीर को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का मिश्रण) से स्नान कराएं। यदि आपके पास माता की तस्वीर है तो उस पर श्रद्धा भाव से गंगाजल के छींटे दें। स्नान कराने के बाद माता को कुमकुम, रोली, अक्षत, चंदन और उनके प्रिय सफेद फूल अर्पित कर उनका श्रृंगार करें। इसके बाद माता के समक्ष धूप और घी का दीप प्रज्वलित करें और उन्हें उनका प्रिय ‘शक्कर या मिश्री’ का भोग लगाएं। पूजा के अंत में कपूर या घी का दीपक जलाकर मां ब्रह्मचारिणी की सप्रेम आरती करें और उनसे अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करने की विनती करें।

मां ब्रह्मचारिणी के चमत्कारी मंत्र

पूजा करते समय माता के इन सिद्ध मंत्रों का जाप करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है और पूजा सफल मानी जाती है:

पूजा मंत्र:

ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥

प्रार्थना मंत्र:

दधाना कर पद्माभ्यामक्षमाला कमण्डलू। देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥

(हिंदी अर्थ: जिनके एक हाथ में अक्षमाला और दूसरे हाथ में कमंडल है, ऐसी उत्तम ब्रह्मचारिणी रूपा मां दुर्गा मुझ पर अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखें।)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1. नवरात्रि के दूसरे दिन कौन सी माता की पूजा होती है? उत्तर: नवरात्रि के पावन पर्व के दूसरे दिन मां दुर्गा के द्वितीय स्वरूप ‘मां ब्रह्मचारिणी’ की पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है।

Q2. मां ब्रह्मचारिणी को कौन सा फल चढ़ाना चाहिए? उत्तर: माता को भोग के रूप में सेब, केला या कोई भी ऋतुफल (मौसमी फल) चढ़ाया जा सकता है। चूंकि माता को सादगी और सफेद रंग पसंद है, इसलिए विशेषकर पीले या सफेद फल चढ़ाना बहुत शुभ माना जाता है।

Q3. विद्यार्थियों के लिए मां ब्रह्मचारिणी की पूजा क्यों खास है? उत्तर: मां ब्रह्मचारिणी को ज्ञान, विद्या और एकाग्रता की देवी माना जाता है। इनकी नियमित पूजा करने से विद्यार्थियों का मन पढ़ाई में लगता है, उनकी एकाग्रता बढ़ती है और उन्हें उनके तप यानी उनकी कड़ी मेहनत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।

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