त्र्यंबकेश्वर: महाराष्ट्र में आषाढ़ी वारी का भक्तिमय उल्लास शुरू हो चुका है। संत ज्ञानेश्वर माउली के ज्येष्ठ बंधु और गुरु, संत श्रेष्ठ श्री निवृत्तिनाथ महाराज की पालखी ने सोमवार (29 जून) को त्र्यंबकेश्वर से पंढरपुर के लिए प्रस्थान किया। ‘जय जय राम कृष्ण हरी’ और ‘जय जय विट्ठल जय हरी विट्ठल’ के गगनभेदी जयघोष के बीच पूरी त्र्यंबक नगरी विट्ठल की भक्ति में सराबोर नजर आई। टाळ और मृदंग की थाप पर झूमते वारकरियों ने इस महायात्रा का श्रीगणेश किया।
26 दिनों का लंबा प्रवास, 60 दिंडियों के साथ हजारों वारकरी शामिल
आषाढ़ी एकादशी के पावन पर्व पर हर साल होने वाली इस वारी का वारकरियों को बेसब्री से इंतजार रहता है। इस वर्ष पालखी यात्रा में 60 दिंडियों के साथ हजारों वारकरी पूरे उत्साह के साथ सहभागी हुए हैं।
यह कोई साधारण यात्रा नहीं है; 26 दिनों के इस लंबे और कठिन प्रवास में वारकरी नासिक, अहिल्यानगर (अहमदनगर) और सोलापुर जिलों से होते हुए लगभग 450 किलोमीटर की पैदल यात्रा करेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, यह भव्य पालखी 24 जुलाई को पंढरपुर में दाखिल होगी। इसके बाद 25 से 28 जुलाई तक पालखी का मुक्काम पंढरपुर में ही रहेगा, जहां वारकरी अपने आराध्य विठुराया (भगवान विट्ठल) के दर्शन कर कृतार्थ होंगे। वारी का पहला मुकाम गुरुस्थानी महानिर्वाणी अखाड़ा में रखा गया है। यात्रा के दौरान जगह-जगह कीर्तन, भजन और आरती का आयोजन किया जा रहा है।
चांदी की कलाकृतियों से सजा शीशम का रथ, सुरक्षा के लिए सीसीटीवी
पालखी का रथ अपने आप में आकर्षण का केंद्र है। सात वर्ष पूर्व बनाए गए इस रथ का निर्माण शीशम की लकड़ी से किया गया है। इस रथ पर 230 किलो चांदी के पत्रों पर उकेरी गई बारीक कलाकृतियां (नक्काशी) इसकी भव्यता को और बढ़ा देती हैं। इस उत्कृष्ट कलाकारी पर लगभग डेढ़ करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इसी सजे हुए रथ में संत निवृत्तिनाथ महाराज की चांदी की प्रतिमा और पादुकाओं को पंढरपुर ले जाया जा रहा है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, इस वर्ष रथ में सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। प्रशासन द्वारा भी पालखी समारोह के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
भाव वहां भगवान: बुजुर्गों की आंखों में दिखी विट्ठल दर्शन की गहरी आस
वारी केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि आस्था का महासागर है। पालखी के प्रस्थान के समय कुशावर्त तीर्थ और मंदिर परिसर में कई ऐसे दृश्य देखने को मिले जिन्होंने वहां मौजूद हर शख्स को भावुक कर दिया। झुर्रियों से भरे चेहरे, हाथों में हरी चूड़ियां और माथे पर कुमकुम लगाए कई बुजुर्ग माताएं भी इस वारी में पूरे उत्साह के साथ शामिल हुई हैं। उनके चेहरों की थकान पर विट्ठल से मिलने की गहरी आस भारी पड़ रही थी। यह दृश्य सचमुच ‘भाव तेथे देव’ (जहां भाव, वहां भगवान) की उक्ति को प्रत्यक्ष रूप से चरितार्थ कर रहा था।
अमित ठाकरे दिखे पारंपरिक वारकरी वेशभूषा में, दिग्गजों ने टेका मत्था
पालखी प्रस्थान के इस भव्य समारोह में राजनीति से जुड़े कई गणमान्य चेहरों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। राज्य के कुंभमेला मंत्री गिरीश महाजन और महाराष्ट्र नवनिर्माण विद्यार्थी सेना के अध्यक्ष अमित ठाकरे ने पालखी का विधिवत शुभारंभ किया। इस दौरान अमित ठाकरे पूरी तरह से पारंपरिक वारकरी वेशभूषा में नजर आए, जिसने वहां मौजूद लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा।
प्रस्थान से पूर्व कुशावर्त तीर्थ में संत निवृत्तिनाथ महाराज की चरण पादुकाओं का अभिषेक और पूजन किया गया। नगराध्यक्ष त्रिवेणी तुंगार और उनके पति के हाथों यह पवित्र जलाभिषेक संपन्न हुआ। इसके साथ ही संत श्रेष्ठ निवृत्ति महाराज की समाधि का भी पूजन किया गया और पालखी रथ के समक्ष श्रीफल फोड़कर इस वारी की औपचारिक शुरुआत की गई। इस अवसर पर स्थानीय विधायक गोकुल गीते, गजानन काले, स्नेहल आदरकर, मिलिंद घाग, सचिव प्रशांत मांढरे, सोनाली पाटिल, संदीप भवर और ललित वाघ सहित कई मान्यवर और श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
विठ्ठल-रुक्मिणी तुलसी अर्चना पूजा के लिए पंजीकरण शुरू
इस बीच, पंढरपुर में श्री विठ्ठल-रुक्मिणी माता मंदिर समिति ने 1 से 9 जुलाई के बीच भक्तों के लिए तुलसी अर्चना पूजा उपलब्ध कराई है। मंदिर समिति के कार्यकारी अधिकारी राजेंद्र शेलके के अनुसार, इस पूजा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण 30 जून को सुबह 11 बजे से शुरू हो गया है। इस पूजा के लिए दान राशि 2100 रुपये रखी गई है। भीड़ वाले दिनों और त्योहारों को छोड़कर, भक्त 1 से 9 जुलाई के दौरान इस पूजा का लाभ उठा सकते हैं। अधिक जानकारी और पंजीकरण के लिए भक्त मंदिर समिति की आधिकारिक वेबसाइट https://www.vitthalrukminimandir.org पर जा सकते हैं।

