पंढरपुर वारी 2026: 'ज्ञानोबा-तुकाराम' के जयघोष से गूंजा महाराष्ट्र, यहाँ देखें पालखी का पूरा रूट|

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महाराष्ट्र की महान आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक ‘पंढरपुर वारी’ एक बार फिर शुरू हो गई है। लाखों ‘वारकरी’ (भक्त) अपने आराध्य भगवान विट्ठल (पांडुरंग) के दर्शन की आस लिए पंढरपुर की ओर निकल पड़े हैं। ‘ज्ञानोबा-तुकाराम’ के अखंड जयघोष और मृदंग-ताल की गूंज से पूरा महाराष्ट्र भक्ति रस में सराबोर हो गया है।

अगर आप भी इस साल आषाढ़ी एकादशी (25 जुलाई 2026) के पावन अवसर पर इस महायात्रा से जुड़ना चाहते हैं या वारी का मार्ग जानना चाहते हैं, तो यह संपूर्ण गाइड आपके लिए है।

देहू और आळंदी से हुआ महाप्रस्थान

इस वर्ष संत तुकाराम महाराज के 341वें पालखी सोहले (समारोह) की शुरुआत 7 जुलाई को श्रीक्षेत्र देहू से हुई। वहीं, संत श्रेष्ठ ज्ञानेश्वर महाराज (माउली) की पालखी ने 8 जुलाई को आळंदी से प्रस्थान किया।

ख़ास बातें:

  • इंद्रायणी नदी में बाढ़: लगातार हो रही भारी बारिश के कारण देहू और आळंदी में इंद्रायणी नदी उफान पर है। हालांकि जलस्तर थोड़ा कम हुआ है, लेकिन प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर नदी में स्नान करने पर रोक लगा दी है।

  • उत्साह चरम पर: बारिश की फुहारों के बीच वारकरियों का उत्साह देखते ही बन रहा है। महिलाएं मंदिर परिसर में ‘फुगड़ी’ (पारंपरिक महाराष्ट्रीयन खेल) खेलती नजर आईं।

  • महापूजा: देहू में संत तुकाराम महाराज की पादुकाओं की महापूजा उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार और कोल्हापुर के युवराज संभाजीराजे छत्रपति के शुभ हाथों संपन्न हुई। पादुकाओं को विशेष रूप से चमकाया गया था और दोपहर 3 बजे पालखी ने पंढरपुर के लिए प्रस्थान किया।

📍 संत तुकाराम महाराज पालखी का मार्ग और शेड्यूल (2026)

संत तुकाराम महाराज की पालखी देहू से शुरू होकर विभिन्न पड़ावों से होते हुए पंढरपुर पहुँचती है। इसका विस्तृत कार्यक्रम इस प्रकार है:

  • 7 जुलै: देहू से प्रस्थान; रात को इनामदार वाडा में मुक्काम (विश्राम)

  • 8 जुलै: देहू से आकुर्डी विट्ठल मंदिर; मुक्काम

  • 9 जुलै: आकुर्डी से निवडुंगा विठोबा मंदिर, नाना पेठ (पुणे); मुक्काम और संत ज्ञानेश्वर महाराज पालखी से भेंट

  • 10 जुलै: पुणे में विश्रांति (आराम का दिन)

  • 11 जुलै: पुणे से लोणी कालभोर

  • 12 जुलै: लोणी कालभोर से यवत

  • 13 जुलै: यवत से वरवंड

  • 14 जुलै: वरवंड से उंडवडी गवली (उंडवडी गवळ्याची)

  • 15 जुलै: उंडवडी गवली से बारामती

  • 16 जुलै: बारामती से सणसर

  • 17 जुलै: सणसर से निमगाव केतकी

  • 18 जुलै: निमगाव केतकी से इंदापूर

  • 19 जुलै: इंदापूर से सराटी

  • 20 जुलै: सराटी से अकलूज (माने विद्यालय)

  • 21 जुलै: अकलूज माने विद्यालय से बोरगाव

  • 22 जुलै: बोरगाव से पिराची कुरोली

  • 23 जुलै: पिराची कुरोली से वाखरी

  • 24 जुलै: वाखरी से श्रीक्षेत्र पंढरपुर

  • 25 जुलै: आषाढ़ी एकादशी (पंढरपुर में श्री विट्ठल दर्शन)

📍 संत ज्ञानेश्वर महाराज (माउली) पालखी का मार्ग और शेड्यूल (2026)

संत ज्ञानेश्वर महाराज की पालखी आळंदी से शुरू होकर सासवड, जेजुरी होते हुए पंढरपुर की ओर बढ़ती है।

  • 8 जुलै: आळंदी से प्रस्थान

  • 9 जुलै: आळंदी से भवानी पेठ (पुणे); वाकडेवाडी में संत तुकाराम महाराज पालखी से भेंट

  • 10 जुलै: पुणे में विश्रांति (आराम का दिन)

  • 11 जुलै: पुणे से सासवड

  • 12 जुलै: सासवड में विश्रांति

  • 13 जुलै: सासवड से जेजुरी

  • 14 जुलै: जेजुरी से वाल्हे

  • 15 जुलै: वाल्हे से लोणंद

  • 16 जुलै: लोणंद से तरडगाव

  • 17 जुलै: तरडगाव से फलटण

  • 18 जुलै: फलटण से बरड

  • 19 जुलै: बरड से नातेपुते

  • 20 जुलै: नातेपुते से मालशिरस (माळशिरस)

  • 21 जुलै: मालशिरस से वेलापुर (वेळापूर)

  • 22 जुलै: वेलापुर से भंडीशेगाव

  • 23 जुलै: भंडीशेगाव से वाखरी

  • 24 जुलै: वाखरी से श्रीक्षेत्र पंढरपुर

  • 25 जुलै: आषाढ़ी एकादशी (पंढरपुर में श्री विट्ठल दर्शन)

वारी से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें 

  1. पुणे में संगम: 9 और 10 जुलाई को पुणे शहर में दोनों प्रमुख पालखियों का संगम होता है। इस दौरान पूरा पुणे शहर भक्तिमय हो जाता है। 10 जुलाई का दिन दोनों पालखियों के लिए विश्राम का दिन होता है।

  2. रिंगण सोहला: यात्रा के दौरान कई स्थानों पर (जैसे इंदापूर, अकलूज, मालशिरस आदि में) ‘रिंगण’ का आयोजन होता है, जहाँ घोड़े (अश्व) दौड़ते हैं और वारकरी गोल घेरा बनाकर भजन-कीर्तन करते हैं। यह दृश्य देखने लायक होता है।

  3. वाखरी में महासंगम: 23-24 जुलाई को वाखरी गाँव में महाराष्ट्र भर से आने वाली सभी संतों की पालखियां एक साथ मिलती हैं और यहाँ से एक विशाल जनसैलाब पंढरपुर की ओर बढ़ता है।

  4. व्यवस्था: प्रशासन और विभिन्न संस्थाओं द्वारा वारकरियों के लिए भोजन, पानी, चिकित्सा और मोबाइल टॉयलेट की जगह-जगह व्यवस्था की गई है।

इस साल 25 जुलाई 2026 को आषाढ़ी एकादशी के दिन यह पवित्र यात्रा पंढरपुर में भगवान विट्ठल और रुक्मिणी माता के दर्शन के साथ संपन्न होगी। राम कृष्ण हरी!