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हनुमान जी के कितने नाम हैं? जानिए बजरंगबली के 108 नामों की लिस्ट

By HindiTerminal 7 min read

सनातन धर्म में भगवान हनुमान को कलयुग का सबसे जाग्रत और शीघ्र प्रसन्न होने वाला देवता माना जाता है। जब यह प्रश्न उठता है कि “हनुमान जी के कितने नाम हैं?”, तो शास्त्रों के अनुसार उनके अनगिनत नाम हैं, जो उनके विभिन्न गुणों, लीलाओं, और असीम पराक्रमों पर आधारित हैं। हालाँकि, आध्यात्मिक साधना और शास्त्रों (जैसे आनंद रामायण और विभिन्न स्तोत्रों) के अनुसार, हनुमान जी के मुख्य रूप से 12 प्रमुख नाम, 108 नाम (अष्टोत्तर शतनाम), और 1000 नाम (सहस्रनाम) का विशेष रूप से वर्णन और जाप किया जाता है।

भक्तों के दैनिक जीवन और पूजा-पाठ में उनके 12 और 108 नाम सर्वाधिक प्रचलित और अचूक माने गए हैं।

आनंद रामायण में वर्णित हनुमान जी के 12 प्रमुख नाम

हनुमान जी के असीमित नामों में से 12 नाम सबसे अधिक प्रभावशाली माने जाते हैं। आनंद रामायण में इन 12 नामों का एक विशेष स्तोत्र है। ये 12 नाम हनुमान जी के जीवन के प्रमुख कार्यों और उनके स्वरूप का वर्णन करते हैं:

  1. हनुमान (Hanuman): इन्द्र के वज्र प्रहार से जिनकी ठुड्डी (हनु) टूट गई थी अथवा जो मान-अभिमान से रहित हैं।

  2. अंजनिसुत (Anjanisuta): माता अंजनी के गर्भ से जन्म लेने वाले उनके प्रिय पुत्र।

  3. वायुपुत्र (Vayuputra): पवन देव के आध्यात्मिक पुत्र होने के कारण।

  4. महाबल (Mahabala): जिनके बल और शक्ति की कोई सीमा नहीं है।

  5. रामेष्ट (Rameshta): जो भगवान श्रीराम को अपने प्राणों से भी अधिक प्रिय हैं।

  6. फाल्गुनसख (Phalguna Sakha): महाभारत युद्ध में अर्जुन (फाल्गुन) के रथ की ध्वजा पर विराजमान होकर उनकी सहायता करने वाले (अर्जुन के मित्र)।

  7. पिंगाक्ष (Pingaksha): जिनकी आँखों का रंग लाल और भूरा है।

  8. अमितविक्रम (Amitavikrama): जिनका पराक्रम असीमित है और जो कोई भी कार्य करने में सक्षम हैं।

  9. उदधिक्रमण (Udadhikramana): माता सीता की खोज में सौ योजन के विशाल समुद्र को एक छलांग में लांघने वाले।

  10. सीताशोकविनाशन (Sita Shoka Vinashana): अशोक वाटिका में माता सीता को प्रभु राम की मुद्रिका देकर उनका शोक और दुःख दूर करने वाले।

  11. लक्ष्मणप्राणदाता (Lakshmana Pranadata): मेघनाद के बाण से मूर्छित लक्ष्मण जी के लिए संजीवनी बूटी लाकर उनके प्राण बचाने वाले।

  12. दशग्रीवदर्पहा (Dashagriva Darpaha): लंका दहन करके दस सिर वाले रावण (दशग्रीव) के घमंड को चकनाचूर करने वाले।

हनुमान जी के 108 नाम (श्री हनुमान अष्टोत्तर शतनामावली)

12 नामों के अलावा, शास्त्रों में भगवान हनुमान के 108 नामों का अत्यधिक महत्व है। हिंदू धर्म में 108 की संख्या पूर्णता का प्रतीक है। ‘श्री हनुमान अष्टोत्तर शतनामावली’ में वर्णित उनके संपूर्ण 108 नाम और उनके अर्थ इस प्रकार हैं:

  1. आंजनेय: माता अंजनी के पुत्र।

  2. महावीर: अत्यंत वीर और पराक्रमी।

  3. हनूमत: जिनके गाल (हनु) इन्द्र के वज्र से सूज गए थे।

  4. मारुतात्मज: पवन देव (मारुत) के पुत्र।

  5. तत्वज्ञानप्रद: परम ज्ञान और बुद्धि देने वाले।

  6. सीतादेविमुद्राप्रदायक: माता सीता को भगवान राम की मुद्रिका (अंगूठी) सौंपने वाले।

  7. अशोकवनकाच्छेत्रे: लंका की अशोक वाटिका का विनाश करने वाले।

  8. सर्वमायाविभंजन: हर प्रकार की माया और भ्रम को तोड़ने वाले।

  9. सर्वबन्धविमोक्त्रे: सभी प्रकार के बंधनों से मुक्ति दिलाने वाले।

  10. रक्षोविध्वंसकारक: राक्षसों और दुष्टों का वध करने वाले।

  11. परविद्या परिहार: शत्रुओं के बुरे ज्ञान और तंत्र को नष्ट करने वाले।

  12. परशौर्य विनाशन: शत्रुओं के पराक्रम और शौर्य का नाश करने वाले।

  13. परमन्त्र निराकर्त्रे: शत्रुओं के मंत्रों को निष्फल करने वाले।

  14. परयन्त्र प्रभेदक: शत्रुओं के यंत्रों को तोड़ने वाले।

  15. सर्वग्रह विनाशी: सभी ग्रहों के बुरे प्रभावों और दोषों को खत्म करने वाले।

  16. भीमसेन सहायकृथे: महाभारत में भीम की सहायता करने वाले।

  17. सर्वदुखः हरा: भक्तों के सभी दुखों को हरने वाले।

  18. सर्वलोकचारिणे: तीनों लोकों में अबाध रूप से विचरण करने वाले।

  19. मनोजवाय: मन की गति के समान तीव्र गति वाले।

  20. पारिजात द्रुमूलस्थ: स्वर्ग के पारिजात वृक्ष के नीचे निवास करने वाले।

  21. सर्वमन्त्र स्वरूपवते: सभी मंत्रों के साक्षात स्वरूप।

  22. सर्वतन्त्र स्वरूपिणे: सभी तंत्रों के साक्षात स्वरूप।

  23. सर्वयन्त्रात्मक: सभी यंत्रों की आत्मा और स्वरूप।

  24. कपीश्वर: वानरों के ईश्वर या श्रेष्ठ।

  25. महाकाय: अत्यंत विशाल और विराट शरीर वाले।

  26. सर्वरोगहरा: भक्तों के सभी शारीरिक और मानसिक रोगों को दूर करने वाले।

  27. प्रभवे: अत्यंत लोकप्रिय और सबके प्रिय।

  28. बल सिद्धिकरा: अतुलित बल और सिद्धियां प्रदान करने वाले।

  29. सर्वविद्या सम्पत्तिप्रदायक: ज्ञान, विद्या और संपत्ति देने वाले।

  30. कपिसेनानायक: सुग्रीव की वानर सेना के प्रमुख।

  31. भविष्यथ्चतुराननाय: भविष्य की सभी घटनाओं के ज्ञाता।

  32. कुमार ब्रह्मचारी: आजन्म युवा और परम ब्रह्मचारी।

  33. रत्नकुण्डल दीप्तिमते: कान में रत्नों के सुंदर कुंडल धारण करने वाले।

  34. चंचलद्वाल सन्नद्धलम्बमान शिखोज्वला: सुंदर और तेजस्वी पूंछ वाले।

  35. गन्धर्व विद्यातत्वज्ञ: गंधर्वों की गायन और कला विद्या के ज्ञाता।

  36. महाबल पराक्रम: अत्यंत महान बल और असीम पराक्रम वाले।

  37. काराग्रह विमुक्त्रे: कारागार (जेल) के बंधनों से मुक्त करने वाले।

  38. शृंखला बन्धमोचक: जंजीरों के बंधन से छुड़ाने वाले।

  39. सागरोत्तारक: विशाल सागर को एक छलांग में पार करने वाले।

  40. प्राज्ञाय: महान विद्वान और बुद्धिमान।

  41. रामदूत: भगवान श्रीराम के परम दूत।

  42. प्रतापवते: अत्यंत प्रतापी और तेजस्वी।

  43. वानर: वानर का रूप धारण करने वाले।

  44. केसरीसुत: वानरराज केसरी के पुत्र।

  45. सीताशोक निवारक: माता सीता के दुःख और शोक को दूर करने वाले।

  46. अन्जनागर्भसम्भूता: माता अंजनी के गर्भ से उत्पन्न।

  47. बालार्कसदृशानन: उगते हुए बाल सूर्य के समान तेज मुख वाले।

  48. विभीषण प्रियकर: विभीषण के प्रिय और हितैषी।

  49. दशग्रीव कुलान्तक: रावण (दशग्रीव) के कुल का नाश करने वाले।

  50. लक्ष्मणप्राणदात्रे: संजीवनी लाकर लक्ष्मण जी के प्राण बचाने वाले।

  51. वज्रकाय: वज्र (पत्थर) के समान कठोर और मजबूत शरीर वाले।

  52. महाद्युथये: अत्यंत दिव्य और चमत्कारी तेज वाले।

  53. चिरंजीविने: अष्ट चिरंजीवियों में से एक (अमर रहने वाले)।

  54. रामभक्त: भगवान राम के सबसे बड़े और परम भक्त।

  55. दैत्यकार्य विघातक: राक्षसों के बुरे कार्यों में विघ्न डालकर उन्हें रोकने वाले।

  56. अक्षहन्त्रे: रावण के पुत्र अक्षकुमार का वध करने वाले।

  57. कांचनाभ: सोने के समान चमकने वाले शरीर (आभा) वाले।

  58. पंचवक्त्र: पांच मुख वाले (पंचमुखी हनुमान)।

  59. महातपसी: महान तप करने वाले तपस्वी।

  60. लन्किनी भंजन: लंका की रक्षक राक्षसी लंकिनी का वध करने वाले।

  61. श्रीमते: अत्यंत आदरणीय और प्रतिष्ठित।

  62. सिंहिकाप्राण भंजन: समुद्र में परछाई पकड़ने वाली राक्षसी सिंहिका के प्राण लेने वाले।

  63. गन्धमादन शैलस्थ: गंधमादन पर्वत पर निवास करने वाले।

  64. लंकापुर विदाहक: अपनी पूंछ से लंकापुरी को भस्म करने वाले।

  65. सुग्रीव सचिव: वानरराज सुग्रीव के मुख्य मंत्री।

  66. धीर: अत्यंत वीर और धैर्यवान।

  67. शूर: असीम साहसी।

  68. दैत्यकुलान्तक: राक्षसों के पूरे वंश का नाश करने वाले।

  69. सुरार्चित: देवताओं द्वारा पूजे जाने वाले।

  70. महातेजस: महान तेज और प्रकाश वाले।

  71. रामचूडामणिप्रदायक: भगवान राम को माता सीता की निशानी (चूड़ामणि) देने वाले।

  72. कामरूपिणे: अपनी इच्छानुसार कोई भी रूप (छोटा या बड़ा) धारण करने वाले।

  73. पिंगलाक्ष: भूरी (पिंगल) आँखों वाले।

  74. वार्धिमैनाक पूजित: समुद्र के मैनाक पर्वत द्वारा पूजित और सम्मानित।

  75. कबलीकृत मार्तण्डमण्डलाय: बालपन में सूर्य देव (मार्तण्ड) को फल समझकर निगलने वाले।

  76. विजितेन्द्रिय: अपनी सभी इंद्रियों को जीतने वाले (जितेन्द्रिय)।

  77. रामसुग्रीव सन्धात्रे: भगवान राम और सुग्रीव की मित्रता (संधि) कराने वाले।

  78. महारावण मर्दन: महान रावण के अहंकार का मर्दन करने वाले।

  79. स्फटिकाभा: स्फटिक मणि के समान निर्मल और पवित्र।

  80. वागधीश: वाणी और ज्ञान के देवता।

  81. नवव्याकृतपण्डित: सभी नौ व्याकरणों के महान ज्ञाता और पंडित।

  82. चतुर्बाहवे: चार भुजाओं वाले (विशिष्ट स्वरूप)।

  83. दीनबन्धुरा: दीनों, गरीबों और असहायों के रक्षक।

  84. महात्मा: महान आत्मा वाले।

  85. भक्तवत्सल: अपने भक्तों से अत्यंत प्रेम करने वाले।

  86. संजीवन नगायार्था: संजीवनी बूटी का पर्वत (नग) लाने वाले।

  87. सुचये: परम पवित्र।

  88. वाग्मिने: उत्तम वक्ता और संचारक।

  89. दृढव्रता: अपने कठोर व्रतों और संकल्पों का पालन करने वाले।

  90. कालनेमि प्रमथन: कपटी राक्षस कालनेमि का वध करने वाले।

  91. हरिमर्कट मर्कटा: वानरों के सम्राट और सर्वोपरि।

  92. दान्त: शांत स्वभाव वाले।

  93. शान्त: परम शांति को धारण करने वाले।

  94. प्रसन्नात्मने: हमेशा प्रसन्न और आनंदित आत्मा वाले।

  95. शतकन्ठमदापहते: सौ सिर वाले (शतकंठ) राक्षस के अहंकार को नष्ट करने वाले।

  96. योगी: परम योगी और ध्यान केंद्रित करने वाले।

  97. रामकथा लोलाय: भगवान राम की कथा सुनने के लिए हमेशा लालायित रहने वाले।

  98. सीतान्वेषण पण्डित: माता सीता की खोज करने में सबसे निपुण।

  99. वज्रद्रन्ष्ट्र: वज्र के समान कठोर दाँत वाले।

  100. वज्रनख: वज्र के समान तीखे और कठोर नाखूनों वाले।

  101. रुद्रावीर्य समुद्भवा: भगवान शिव (रुद्र) के अंश से उत्पन्न।

  102. इन्द्रजित्प्रहितामोघब्रह्मास्त्र विनिवारक: इंद्रजीत द्वारा छोड़े गए अमोघ ब्रह्मास्त्र के प्रभाव को स्वीकार कर उसे नष्ट करने वाले।

  103. पार्थ ध्वजाग्रसंवासिने: महाभारत में अर्जुन (पार्थ) के रथ की ध्वजा पर विराजमान होने वाले।

  104. शरपंजर भेदक: तीरों के अभेद्य पिंजरे को तोड़ने वाले।

  105. दशबाहवे: दस भुजाओं वाले (विशिष्ट तांत्रिक स्वरूप में)।

  106. लोकपूज्य: पूरे ब्रह्मांड और संसार द्वारा पूजनीय।

  107. जाम्बवत्प्रीतिवर्धन: ऋक्षराज जाम्बवंत का प्रेम और सम्मान जीतने वाले।

  108. सीताराम पादसेवक: माता सीता और भगवान श्रीराम के चरणों के परम सेवक।

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