वरलक्ष्मी व्रत हिंदू धर्म में एक अत्यंत शुभ और फलदायी व्रत माना जाता है। यह व्रत विशेष रूप से स्त्रियों द्वारा मनोकामना पूर्ति, परिवार की सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए रखा जाता है। इस दिन देवी लक्ष्मी के वर स्वरूप की पूजा की जाती है। आइए विस्तार से जानते हैं कि वर्ष 2025 में वरलक्ष्मी व्रत कब है, इसका महत्व क्या है, और किस विधि से यह व्रत किया जाता है।

वरलक्ष्मी व्रत 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त

वर्ष 2025 में वरलक्ष्मी व्रत शुक्रवार, 8 अगस्त को मनाया जाएगा। यह दिन शुक्रवार का है, जो देवी लक्ष्मी को समर्पित माना जाता है और इस कारण इसका विशेष धार्मिक महत्व है। पूजा के लिए चार शुभ मुहूर्त निर्धारित किए गए हैं, जो स्थिर लग्नों पर आधारित हैं। प्रातःकाल का सिंह लग्न मुहूर्त प्रातः 06:29 बजे से 09:31 बजे तक है, जो पूजा के लिए सबसे उपयुक्त समय माना जाता है। यदि आप दोपहर में पूजा करना चाहें तो वृश्चिक लग्न का समय दोपहर 01:34 बजे से 04:50 बजे तक रहेगा। संध्या समय के लिए कुम्भ लग्न का मुहूर्त 08:26 PM से 09:43 PM तक है।

वरलक्ष्मी व्रत का धार्मिक महत्व:Varalakshmi Vratam 2025

वरलक्ष्मी व्रत का उल्लेख पद्म पुराण और स्कंद पुराण जैसे प्रमुख धर्मग्रंथों में मिलता है, जहाँ इसे एक अत्यंत पुण्यदायी और फलदायी व्रत के रूप में बताया गया है। यह व्रत विशेष रूप से स्त्रियों के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह व्रत उन्हें पारिवारिक समृद्धि, दांपत्य सौख्य और संतति सुख प्रदान करने वाला होता है। हालांकि यह व्रत मुख्य रूप से महिलाएं करती हैं, लेकिन पुरुष भी अपनी श्रद्धा, भक्ति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से इस व्रत में सहभागी बन सकते हैं या घर की महिलाओं के साथ पूजा-अर्चना में भाग ले सकते हैं। दक्षिण भारत के राज्यों जैसे तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और महाराष्ट्र के कुछ भागों में इसे अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है।

इस दिन महिलाएं पारंपरिक वस्त्र पहनकर, आभूषणों से सजकर, कलश स्थापना करती हैं और देवी लक्ष्मी का पूजन करती हैं। मंदिरों में विशेष अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं और घरों में भी सामूहिक रूप से स्त्रियाँ व्रत करती हैं। व्रत का प्रमुख उद्देश्य होता है – धन, ऐश्वर्य, स्वास्थ्य, संतान सुख, सौभाग्य और जीवन में स्थिरता की प्राप्ति। यह सावन मास के किसी भी शुक्रवार को किया जाता है, क्योंकि शुक्रवार को देवी लक्ष्मी का विशेष दिन माना गया है। ऐसा विश्वास है कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत करने पर देवी लक्ष्मी व्रती को मनोवांछित वर देती हैं और उनके जीवन से दरिद्रता, बाधाएँ और दुःख समाप्त हो जाते हैं।

इस व्रत को “वर-लक्ष्मी व्रत” इसलिए कहा जाता है क्योंकि देवी लक्ष्मी इस दिन व्रत करने वालों को ‘वर’ यानी आशीर्वाद प्रदान करती हैं। यह न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है, क्योंकि यह स्त्रियों को मानसिक बल, आत्मविश्वास और समर्पण की भावना से भर देता है।

वरलक्ष्मी व्रत कथा

पुराणों में वर्णित एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, प्राचीन काल में मगध देश में चारुमती नामक एक धर्मपरायण, विनम्र और सदाचारी स्त्री निवास करती थी। वह अपने परिवार की सेवा, समाज के प्रति दायित्व और धार्मिक कर्तव्यों को पूरी निष्ठा से निभाती थी। एक बार उसे रात्रि में स्वप्न आया जिसमें स्वयं माता लक्ष्मी ने दर्शन दिए और उसे वरलक्ष्मी व्रत करने का निर्देश दिया। देवी ने कहा कि यदि वह इस व्रत को विधिपूर्वक संपन्न करेगी, तो उसके जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य स्थायी रूप से स्थापित होंगे।

चारुमती ने जागने के बाद इस स्वप्न को देववाणी मानकर अत्यंत श्रद्धा, विश्वास और उत्साह के साथ इस व्रत को सम्पन्न किया। उसने व्रत की सभी विधियों का पालन किया, कलश स्थापना की, विधिपूर्वक पूजा की, व्रत कथा सुनी और आरती करके माता लक्ष्मी से आशीर्वाद प्राप्त किया। परिणामस्वरूप, उसके जीवन में धन, आरोग्य, संतोष और पारिवारिक सुख का ऐसा प्रवाह हुआ कि सभी लोग उससे प्रेरित होकर इस व्रत को करने लगे।

इस प्रकार, चारुमती की आस्था और देवी लक्ष्मी की कृपा से यह व्रत अन्य महिलाओं में भी लोकप्रिय हो गया। कालांतर में यह व्रत पूरे भारतवर्ष, विशेषकर दक्षिण भारत की महिलाओं में बहुत श्रद्धा और विश्वास से किया जाने लगा और आज भी इसे बड़ी श्रद्धा और विधिपूर्वक मनाया जाता है।

Varalakshmi Vratam 2025 : वरलक्ष्मी व्रत 2025 की पूजा विधि

व्रत की तैयारी एक दिन पहले

व्रत से एक दिन पूर्व घर की पूर्ण सफाई करनी चाहिए और पूजा स्थल को पवित्र करना चाहिए। पूजा में उपयोग होने वाली सभी सामग्री जैसे कलश, नारियल, फल, फूल, मिठाई, धूप, दीप आदि को पहले से ही एकत्रित कर लेना चाहिए।

प्रातः स्नान और संकल्प:Varalakshmi Vratam 2025

व्रत के दिन प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। फिर शांत मन से संकल्प लें कि “मैं वरलक्ष्मी व्रत कर रही हूँ, देवी लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए।” यह संकल्प व्रत की आत्मा है और उसी भावना से पूजा करनी चाहिए।

पूजा सामग्री:Varalakshmi Vratam 2025

इस व्रत में प्रयोग की जाने वाली पूजा सामग्री में मुख्यतः कलश (चांदी, तांबे या मिट्टी का), नारियल, आम या अशोक के पत्ते, अक्षत, हल्दी, कुमकुम, फूल, दीपक, घी, पंचामृत, फल, मिष्ठान्न, सूखा मेवा, और देवी लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र सम्मिलित होते हैं।

पूजन विधि:Varalakshmi Vratam 2025

सबसे पहले कलश में जल, सुपारी और सिक्के डालकर उस पर नारियल रखें। फिर इसे लाल या पीले वस्त्र पर रखें और आम के पत्तों से सजाएं। देवी लक्ष्मी को हल्दी-कुमकुम लगाएं, फूल अर्पित करें और श्रीसूक्त अथवा लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनामावली का पाठ करें। नैवेद्य चढ़ाएं, दीप जलाएं और अंत में आरती करें। पूजा के पश्चात प्रसाद का वितरण करें।

व्रत नियम:Varalakshmi Vratam 2025

वरलक्ष्मी व्रत के दिन सात्विकता और शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है। व्रती महिला को पूरे दिन उपवास रखना चाहिए, लेकिन यदि स्वास्थ्यवश संभव न हो तो फलाहार किया जा सकता है। इस दिन मन, वचन और कर्म से पूर्ण शुद्धता का पालन करना आवश्यक होता है।

सरल तरीक़े से घर पर Varalakshmi Vratam 2025 वरलक्ष्मी व्रत पूजा कैसे करें?

यदि आप घर पर आसान तरीके से पूजा करना चाहते हैं, तो नीचे एक सरल विधि दी गई है जिसे आप बिना किसी विशेष तैयारी के भी श्रद्धा से कर सकते हैं। यदि आपके पास बहुत अधिक समय या जटिल विधियों की जानकारी नहीं है, तो भी आप वरलक्ष्मी व्रत को पूरी श्रद्धा के साथ घर पर सरल रूप से कर सकते हैं।

  1. प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थान को साफ़ करें।
  2. एक साफ़ थाली में लाल कपड़ा बिछाकर उस पर एक कलश रखें। कलश में जल, सुपारी, एक सिक्का और अक्षत डालें।
  3. कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते लगाएँ और उस पर नारियल रखें।
  4. कलश के पास लक्ष्मी माता की मूर्ति या चित्र रखें।
  5. माता को हल्दी, कुमकुम, चावल, फूल, और मिठाई अर्पित करें।
  6. दीपक जलाकर, एक माला से लक्ष्मी बीज मंत्र का 11 बार जप करें: “ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः।”
  7. एक छोटा सा नैवेद्य अर्पित करें (जैसे फल या घर में बना हलवा)।
  8. अंत में आरती करें और परिवार में प्रसाद बाँटें।

यह विधि विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए उपयोगी है जो पहली बार व्रत कर रही हैं या जिनके पास सीमित समय व साधन हैं। याद रखें, पूजा में सबसे ज़रूरी चीज़ है श्रद्धा और समर्पण

व्रत के दिन बोले जाने वाले मंत्र

पूजन के दौरान संकल्प मंत्र बोला जाता है: “मम समस्त दोष प्रशमनपूर्वक सर्वाभीष्ट सिद्ध्यर्थं श्रीवरलक्ष्मी पूजनं करिष्ये।”

अर्थ: मैं सभी दोषों के निवारण और अपने सभी इच्छित कार्यों की सिद्धि के लिए श्री वरलक्ष्मी देवी का पूजन कर रहा/रही हूँ।

साथ ही देवी लक्ष्मी का बीज मंत्र इस प्रकार है: “ओं श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ओं महालक्ष्म्यै नम:।”

अर्थ: हे कमल के समान सुंदर, कमल में निवास करने वाली देवी लक्ष्मी, आप प्रसन्न हों, प्रसन्न हों। मैं आपको नमस्कार करता/करती हूँ। आप कृपा करें और मेरे जीवन में ऐश्वर्य एवं सौभाग्य प्रदान करें।

वरलक्ष्मी व्रत से प्राप्त होने वाले लाभ

वरलक्ष्मी व्रत करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। परिवार में आर्थिक समृद्धि आती है और संतान सुख व स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। यह व्रत दरिद्रता, दुख और क्लेश को दूर करने में सहायक होता है। देवी लक्ष्मी की कृपा से जीवन में सौभाग्य का संचार होता है।

भारत के किन राज्यों में वरलक्ष्मी व्रत प्रमुखता से मनाया जाता है?

यह पर्व विशेष रूप से तमिलनाडु में अत्यंत श्रद्धा से मनाया जाता है, जहाँ महिलाएं विशेष श्रृंगार कर देवी की पूजा करती हैं। कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में मंदिरों में विशेष अनुष्ठान होते हैं, जबकि तेलंगाना के ग्रामीण क्षेत्रों में सामूहिक पूजा का आयोजन किया जाता है। महाराष्ट्र में, विशेषतः ब्राह्मण परिवारों में इसे विशेष सम्मान के साथ मनाया जाता है।

निष्कर्ष

वरलक्ष्मी व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि स्त्री शक्ति, श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है। जो भी महिला इस व्रत को पूर्ण श्रद्धा से करती है, उसके जीवन में देवी लक्ष्मी की कृपा से सुख-शांति, समृद्धि और सौभाग्य अवश्य आता है। वर्ष 2025 में यह व्रत 8 अगस्त को पड़ रहा है। आप भी इस दिन व्रत रखकर देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त कर सकती हैं। साथ ही इस पावन अवसर पर अपने जीवन की उन्नति के लिए आगामी शुभ कार्यों, योजनाओं या संकल्पों की शुरुआत कर सकती हैं। ऐसा करना धार्मिक रूप से अत्यंत मंगलकारी और फलदायी माना जाता है।

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