श्री विश्वकर्मा जयंती भगवान विश्वकर्मा को समर्पित एक विशेष दिन है—जिन्हें हिंदू परंपरा में देवताओं का शिल्पकार, वास्तुकार और दिव्य अभियंता माना जाता है। यह दिन सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि कौशल, सृजन, औजारों के सम्मान, और मेहनत की गरिमा का उत्सव भी है।
2026 में श्री विश्वकर्मा जयंती 31 जनवरी (शनिवार) को मनाई जा रही है। अगर आप पहली बार इस जयंती के बारे में सुन रहे हैं, तो यह लेख आपके मन में आने वाले लगभग सभी सामान्य सवालों का जवाब देगा—सरल भाषा में, लेकिन पूरी जानकारी के साथ।
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भगवान विश्वकर्मा कौन हैं?
“भगवान विश्वकर्मा आखिर हैं कौन?”
लोकमान्यता के अनुसार भगवान विश्वकर्मा को ‘सृष्टि के महान कारीगर’ के रूप में पूजा जाता है। उन्हें विश्व का निर्माण करने वाली रचनात्मक शक्ति और कला-शिल्प का अधिष्ठाता माना जाता है। ‘विश्वकर्मा’ शब्द का सामान्य अर्थ लिया जाता है—जो सब कुछ रचता/बनाता है।
हिंदू ग्रंथों और परंपराओं में विश्वकर्मा का स्वरूप समय के साथ विकसित हुआ है। वैदिक संदर्भों में ‘विश्वकर्मन’ को व्यापक सृजन-शक्ति के रूप में समझा जाता है और आगे चलकर यह धारणा देव-शिल्पी विश्वकर्मा के रूप में अधिक स्पष्ट और लोकप्रिय बन गई।
आज के संदर्भ में विश्वकर्मा का संदेश बहुत व्यावहारिक है:
- हुनर (Skill) और परिश्रम
- डिज़ाइन, निर्माण, नवाचार (Innovation)
- उपकरणों और मशीनों का सम्मान
- काम की शुद्धता, सुरक्षा और अनुशासन
यही कारण है कि विश्वकर्मा जयंती/पूजा का संबंध सीधे-सीधे कर्म, कारीगरी और निर्माण-कार्य से जुड़ता है।
श्री विश्वकर्मा जयंती 31 जनवरी को क्यों मनाई जाती है?
“विश्वकर्मा पूजा तो सितंबर में होती है, फिर 31 जनवरी क्यों?”
आपका सवाल बिल्कुल सही है। भारत के कई हिस्सों में विश्वकर्मा पूजा सितंबर (विशेषकर औद्योगिक क्षेत्रों में) बहुत प्रसिद्ध है—जहाँ कारखानों, वर्कशॉप, वाहन-गैरेज, मशीनों, औजारों और कार्यालयों में विधिवत पूजा होती है।
लेकिन कई जगह श्री विश्वकर्मा जयंती को माघ माह में, परंपरा के अनुसार, अलग तिथि/दिन पर भी मनाया जाता है। इसलिए कुछ समुदायों में 31 जनवरी को भी विश्वकर्मा जयंती का आयोजन होता है।
सरल बात:
- एक परंपरा/क्षेत्र में यह पर्व जनवरी–फरवरी के आसपास मनाया जाता है,
- और बहुत से उद्योग/क्षेत्र इसे सितंबर में भी मनाते हैं।
दोनों का उद्देश्य एक ही है—भगवान विश्वकर्मा का पूजन और काम-काज में कुशलता व सुरक्षा की प्रार्थना।
श्री विश्वकर्मा जयंती कौन-कौन मनाते हैं?
यह पर्व केवल किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है। परंपरागत रूप से यह दिन खासतौर पर इनके लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है:
- इंजीनियर (सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, सॉफ्टवेयर)
- वास्तुकार (Architects) और इंटीरियर डिजाइनर्स
- बढ़ई, लोहार, वेल्डर, मिस्त्री, राजमिस्त्री, प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन
- फैक्ट्री वर्कर्स और मशीन ऑपरेटर्स
- मैकेनिक, ऑटोमोबाइल वर्कशॉप, ट्रांसपोर्ट/गैरेज स्टाफ
- टेक्नीशियन, हार्डवेयर रिपेयर प्रोफेशनल
- ITI, पॉलिटेक्निक, इंजीनियरिंग और डिजाइन के छात्र
- छोटे उद्योग/वर्कशॉप के मालिक, फैब्रिकेशन, निर्माण, रिपेयर से जुड़े लोग
सीधा संदेश: जो भी व्यक्ति “कुछ बनाता है”, “कुछ ठीक करता है”, “कुछ डिज़ाइन करता है”—वह विश्वकर्मा के आदर्श से जुड़ सकता है।
आज के समय में श्री विश्वकर्मा जयंती का महत्व क्या है?
“आज के दौर में इस पर्व का क्या मतलब है?”
यह पर्व आधुनिक जीवन से बहुत जुड़ा हुआ है, क्योंकि:
- यह हुनर और मेहनत का सम्मान सिखाता है।
आज लोग परिणाम की तारीफ करते हैं, पर विश्वकर्मा जयंती प्रक्रिया की कीमत बताती है—नाप, माप, सटीकता, धैर्य और गुणवत्ता। - औजारों और मशीनों के प्रति जिम्मेदारी बढ़ाती है।
‘टूल्स की पूजा’ का भाव यह है कि उपकरण हमारे काम के साथी हैं—उनकी देखभाल करना, उन्हें साफ रखना और सही उपयोग करना हमारा कर्तव्य है। - वर्कप्लेस सेफ्टी का संदेश देती है।
कई जगह इस दिन मशीनों की सफाई, सर्विसिंग और निरीक्षण किया जाता है। इससे दुर्घटनाएँ कम होती हैं। - नवाचार और सीखने की प्रेरणा देती है।
विश्वकर्मा का नाम हमें याद दिलाता है कि सीखते रहना, अपग्रेड होते रहना और बेहतर बनाते रहना ही सच्ची प्रगति है।
श्री विश्वकर्मा जयंती कैसे मनाएं?
हर क्षेत्र में तरीका थोड़ा अलग हो सकता है, लेकिन मूल भावना एक ही रहती है—सफाई, कृतज्ञता, पूजा और अनुशासन।
चरण 1: जगह और उपकरण साफ करें (सबसे जरूरी)
- वर्कशॉप/ऑफिस/स्टूडियो/घर का कोना साफ करें।
- औजार, मशीन, वाहन, लैपटॉप, ड्रॉइंग-टूल्स, इंस्ट्रूमेंट्स पोंछें।
- तार/केबल, डेस्क, रैक व्यवस्थित करें।
यह केवल पूजा की तैयारी नहीं—एक तरह से काम की ऊर्जा को रीसेट करना है।
चरण 2: सरल पूजा-स्थान तैयार करें
आप निम्न चीजें रख सकते हैं:
- भगवान विश्वकर्मा की फोटो/मूर्ति
- साफ कपड़ा (पीला/लाल)
- दीपक और अगरबत्ती
- फूल और अक्षत (चावल)
पूजा के पास अपने काम का कोई प्रतीक रखें:
- हथौड़ा, पाना/स्पैनर, स्क्रू-ड्राइवर, माप-फीता,
- ड्रॉइंग स्केल,
- लैपटॉप/कीबोर्ड/टूलकिट,
- या स्टूडेंट्स के लिए किताबें/कॉपी/प्रोजेक्ट फाइल।
चरण 3: भोग क्या चढ़ाएं?
- लड्डू/पेड़ा/हलवा/खीर
- फल
- नारियल
- (इच्छा हो तो) पंचामृत
जो उपलब्ध हो, वही श्रद्धा से अर्पित करें।
चरण 4: मंत्र और प्रार्थना
आप बहुत सरल मंत्र जप सकते हैं:
“ॐ विश्वकर्मणे नमः”
इसे 11, 21 या 108 बार जप सकते हैं।
एक छोटी प्रार्थना (हिंदी में):
“हे भगवान विश्वकर्मा, मेरे कार्य में कुशलता, सुरक्षा, सत्य और सफलता का आशीर्वाद दें। मेरे हाथों से जो रचना हो, वह दूसरों के लिए उपयोगी और शुभ हो।”
चरण 5: आरती और प्रसाद
- दीपक से सरल आरती करें।
- प्रसाद घर में बाँटें या कार्यस्थल में टीम/साथियों के साथ साझा करें।
चरण 6: पूजा के बाद “काम रोकना” क्यों माना जाता है?
कई कारखानों/वर्कशॉप में पूजा के बाद कुछ समय मशीनें नहीं चलाई जातीं। इसका उद्देश्य सम्मान + सुरक्षा है—पूजा के बाद शांत वातावरण, मशीन निरीक्षण, और अनुशासन।
अगर आपके काम की प्रकृति ऐसी है कि रुकना संभव नहीं (जैसे आवश्यक सेवाएँ), तो आप दिन की शुरुआत में पूजा कर सकते हैं और सुरक्षा/क्वालिटी पर विशेष ध्यान रख सकते हैं।
विश्वकर्मा पूजा के लिए कौन-कौन सी सामग्री चाहिए?
यह एक आसान सूची है:
- विश्वकर्मा फोटो/मूर्ति
- दीपक, तेल/घी, बाती
- अगरबत्ती
- फूल
- हल्दी, कुमकुम, अक्षत
- नारियल, फल
- मिठाई
- (वैकल्पिक) कलश में जल
- साफ किए हुए औजार/मशीन/इंस्ट्रूमेंट्स
टिप: पूजा सामग्री से ज्यादा महत्वपूर्ण है सफाई और श्रद्धा।
क्या श्री विश्वकर्मा जयंती केवल हिंदुओं का पर्व है?
यह पर्व हिंदू परंपरा से जुड़ा है, लेकिन इसके मूल मूल्य—कर्म का सम्मान, हुनर की साधना, सुरक्षा, और गुणवत्ता—हर व्यक्ति के लिए उपयोगी हैं। इसलिए कई कार्यस्थलों में इसे एक सांस्कृतिक और पेशेवर उत्सव की तरह भी मनाया जाता है, जहाँ अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोग सम्मानपूर्वक जुड़ते हैं।
सबसे अच्छा तरीका:
- किसी पर दबाव न डालें,
- सबकी मान्यताओं का सम्मान करें,
- और दिन का फोकस सुरक्षा, स्वच्छता, कृतज्ञता और उत्कृष्ट काम पर रखें।
श्री विश्वकर्मा जयंती से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
क्या विश्वकर्मा जयंती और विश्वकर्मा पूजा एक ही है?
उद्देश्य एक ही है—भगवान विश्वकर्मा का पूजन। लेकिन तिथि/दिन क्षेत्र और परंपरा के अनुसार अलग हो सकते हैं। कई जगह जनवरी (जैसे 31 जनवरी 2026) और कई जगह सितंबर में मनाया जाता है।
क्या घर पर विश्वकर्मा पूजा कर सकते हैं?
हाँ, बिल्कुल। विद्यार्थी अपने किताबों/लैपटॉप/प्रोजेक्ट टूल्स की पूजा कर सकते हैं और कामकाजी लोग अपने टूल्स/मशीन/डेस्क को सम्मानपूर्वक पूज सकते हैं।
इस दिन का मुख्य संदेश क्या है?
अपने काम, अपने औजारों और अपनी सीखने की प्रक्रिया का सम्मान करें। गुणवत्ता, सुरक्षा और अनुशासन को प्राथमिकता दें।
क्या उपवास जरूरी है?
उपवास अनिवार्य नहीं है। कई लोग सिर्फ सादा/शुद्ध भोजन करते हैं और अनुशासन रखते हैं।
इस दिन क्या नहीं करना चाहिए?
लापरवाही से काम करना, असुरक्षित तरीके से मशीन चलाना, अनावश्यक बहस या तनाव—इनसे बचें। यह दिन शांत, व्यवस्थित और सकारात्मक ऊर्जा का है।
अंग्रेजी में पढ़ें : Shri Vishwakarma Jayanti 2026 (31 January): Who Is Lord Vishwakarma?



